peace
शनिवार, जनवरी 15, 2011
योग्यता हमेशा रहेगी, अपना भोलापन संभाले रखें
आज के दौर में योग्यता तो कई लोगों में मिल जाती है लेकिन सहजता या कह लें भोलापन कम ही लोगों में मिलता है। आजकल भोले इंसान को बेवकूफ या बुद्धू भी कह दिया जाता है। लोग उसे हंसी का पात्र बना देते हैं। दरअसल भोलापन एक दुर्लभ गुण है, इस गुण के होने से आदमी में जो खास बात आ जाती है वह यह कि वह भेदभाव भूल जाता है, अहंकार से दूर हो जाता है। हमारे दो देवताओं में यह गुण समान है, पहले भगवान शिव और दूसरे बाबा हनुमान। दोनों परम शक्तिशाली, ज्ञानी और पराक्रमी हैं लेकिन दोनों के स्वभाव में भोलापन हैं। हमें इस गुण को साधने का प्रयास करना चाहिए, हम सहज हो जाएंगे। शब्द ज्ञान तो बढ़ा देते हैं लेकिन ध्यान को बाधित कर देते हैं। श्रीहनुमानचालीसा दुनिया में खूब बोली जा रही ऐसी पंक्तियां है जो आपको मौन में उतार देंगी और यहीं से ध्यान, मेडिटेशन घटेगा। इसकी छठवीं चौपाई शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महाजग बंदन को लेकर पंडितों का अलग-अलग मत है। आईए आज शब्द तथा अनुभूति को समझा जाए। कुछ विद्वान कहते हैं शंकर सुवन का अर्थ है हनुमानजी स्वयं शंकर हैं और अन्य का मत है। वे शंकरजी के बेटे हैं। जो पुत्र मानते हैं उनके पास शिवपुराण में व्यक्त हनुमत जन्म कथा का आधार है और स्वयं शंकर हैं ऐसा मानने वाले विनय पत्रिका में प्रकाशित एक क्षेपक कथा का प्रमाण देते हैं। दोहावली तथा आनंद रामायण के प्रसंगों की चर्चा भी की जाती है। सच तो यह है कि हनुमानजी के जन्म की सात-आठ कथाएं हैं। इस कारण भी मान्यता में भेद आना स्वाभाविक है। सुवन शब्द को पकड़कर हम शोध में तो पहुंच सकते हैं, पर भक्ति में नहीं उतर पाएंगे। शंकर सुवन पंक्ति में जो अनुभूति है मात्र शब्द शोध से खोखली हो जाएगी। हमें वहां जाना होगा जहां इनका आरंभ हुआ था। शंकर सुवन लिखते समय तुलसीदासजी का भाव था हनुमानजी को शंकरजी के भोलेपन से जोडऩा। क्योंकि इसी की अगली पंक्ति में लिखा है तेज प्रताप महा जग बंदन। तेजस्वी और प्रतापवान यदि भोलेपन से भरा हो तो वह हनुमान होता है। आज के दौर में जब भोलापन मूर्खता और सरलता बेवकूफी मान ली गई हो तब तुलसी की यह मांग बड़ी जरूरी है कि हनुमान भक्त भोलापन बचा कर रखें। योग्यता और भोलापन मणिकांचन योग है। आज के योग्य लोगों को देख भगवान से यह सवाल पूछने की इच्छा होती है प्रभु, क्या आप वह फर्मा कहीं रख कर भूल गए हो जिसमें भोले और भले लोग तैयार किए जाते थे।
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