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शनिवार, जनवरी 15, 2011

होश में रहें, जीवन खिल उठेगा

केवल खुमारी में न होना ही होश में होना नहीं है। हम होश में हैं या नहीं यह पता चलता है हमारे नजरिए से। हम अपने भीतर की संभावनाओं को सकारात्मक नजरिए से देखें, विपरित परिस्थितियों में भी आंतरिक विकास के प्रति जागरूक रहें। अगर हम होश में रहेंगे तो जीवन में संभावनाएं बरकरार रहेंगी। खुद को पूरे समय होश में रखने का एक तरीका है ध्यान।

कीचड़ में कमल खिलता है यह एक सामान्य सी कहावत है और प्रकृति का सच्चा अनूठा दृश्य है। कमल तो बेजोड़ और सर्वमान्य है ही, हिन्दू देवताओं का अलंकरण और पूजा की सामग्री है।

पर आज बात कीचड़ की कर लें। पहली बात तो यह कि कीचड़ को सिर्फ कीचड़ ही न समझा जाए इसमें कमल होने की संभावना छिपी हुई है। यदि नजर में परमात्मा है तो कीचड़ के भीतर छिपा कमल हम प्राप्त कर सकेंगे, अन्यथा सतही दृष्टि से तो कमल को भी हम कीचड़ बनाकर छोड़ देंगे। कीचड़ और कमल के परमात्मा के नियम को और थोड़ा खुलकर समझ लें। आप दुनियादारी में जितने गहरे उतरते जाएंगे आपको कीचड़ के मायने समझ में आने लगेंगे। अब यदि बाहर कमल खिल सकता हो तो हमारे भीतर क्यों नहीं। हमारे शरीर के श्रेष्ठतम और सातवें चक्र सहस्त्रार का स्वरूप खिले कमल जैसा है। आपके भीतर कीचड़ में कमल खिलने का अर्थ है अब आप जो भी काम करेंगे पूरी तरह होश में करेंगे। कमल के रूप में आपका जागरण खिला है। होश का अर्थ है आप अपने ही कृत्य के दृष्टा हो गए। इस कमल खिलाने की क्रिया का नाम है ध्यान। पर ध्यान के लिए समय की झंझट है लोगों के पास।

कब करें ध्यान। इस वक्त समय के मामले में दो तरह के लोग हैं। एक वे हैं जिन्हें चौबीस घंटे भी कम पड़ रहे हैं दूसरे वे हैं जिन्हें भारी पड़ रहे हैं कि चौबीस घंटे बिताएं तो कैसे बिताएं। एक मध्य मार्ग निकाला जा सकता है। २४ घंटे होश की चिंता छोड़ें। सिर्फ पांच या दस मिनट, पूरी तरह से ध्यान में बिताएं। थोड़ी देर का मेडिटेशन पूरे चौबीस घंटे पर प्रभाव रखेगा। करके देखिए पता लग जाएगा, कीचड़ में कमल कैसे खिलता है।

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