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शनिवार, जनवरी 15, 2011
शब्द संवारते हैं हमारा व्यक्तित्व
कहते हैं सृष्टि की रचना शब्द से हुई है। कोई ब्रह्मनाद इस ब्रह्मांड में गूंजा, फिर उसने रूप धरना शुरू किया। शब्दों में बड़ी शक्ति होती है, हम जब भी कुछ कहें, यह समझकर कहें कि वे हमारे बोले गए शब्द क्या प्रभाव पैदा करेंगे। शब्द हमारा व्यक्तित्व और विचार दोनों बनाते हैं, हमारे भीतर क्या गूंज रहा है, हमारा व्यक्तित्व इसी पर निर्भर करता है। जो शब्द हमारे अंदर हमेशा नाद करते रहते हैं, हम स्वयं भी वैसे ही हो जाते हैं। जिस इंसान के मन में परमात्मा के शब्द गूंज रहे हों, उसे हर जगह केवल परमात्मा की तलाश ही होती है, किसी के मन में हमेशा भौतिक इच्छाओं की आवाज उठती रहती है, सो उसे भौतिक और दैहिक सुख की ही तलाश होती है। शरीर सद्कर्मों और मन सद्विचारों से संवरेगा। सद्विचार संवरते हैं सिमरन से, सिमरन के लिए शब्द-नाम की ताकत चाहिए। नाम महिमा के लिए गुरुनानक देव ने कहा है शब्दे धरती, शब्द अकास, शब्द-शब्द भया परगास। सगली सृस्ट शब्द के पाछे, नानक शब्द घटे घट आछे।। इस शब्द ने धरती, सूर्य, चंद्रमा सारी दुनिया पैदा की है। यही शब्द सबके भीतर अपनी धुनकारें दे रहा है। इस नाम की खोज की जाए जो सबके भीतर है। सभी संत-फकीरों ने अध्यात्म को समझाने के लिए अपने-अपने शब्द दिए हैं जो बाद में नाम-वंदना बन गए। गुरुनानक साहिब ने इसे गुरुवाणी, सच्चीवाणी, अकथ-कथ, हुकम, हरि कीर्तन कहा। ऋषि मुनियों ने इसे कभी आकाशवाणी कहा तो कभी रामधुन। चीनी गुरुओं ने ताओ, मुस्लिम फकीरों ने कलमा, बांगें आसमानी, कलामे इलाही, बताया। ईसा मसीह इसे लोगास बता गए। लेकिन फकीरों ने जो नाम शब्द बताया है इसे हम केवल ऐसे शब्दों से न जोड़ लें जो जुबान से निकलते हैं। यह नाम शब्द एहसास का मामला है। हमारे शरीर के भीतर नाम अपनी अनुभूति रखते हैं।जब हम ध्यान करते हैं तो ये नाम या गुरुमंत्र केवल बोलने के शब्द बनकर नहीं बल्कि सुमिरन ध्यान में अपना नाद देते हैं, गूंज ध्वनि देते हैं। यह भीतरी अनुगूंज हमें गहरे ध्यान में उतारती है। कई लोगों को तो गुरुनानक साहिब के वाहे गुरु संबोधन ने भी ध्यान में उतार दिया। यह नाम जप एक पुकार बन जाता है। परमात्मा को पाने के लिए हम जब आतुर होते हैं और उस आतुरता में जो शब्द उच्चारित होते हैं वे नाम जप बन जाते हैं। शिक्षा पद्धति में विषय की पुनरावृत्ति एक विधि है, जिसे रिवीजन लर्निंग कहते हैं। ऐसे ही अध्यात्म के अभ्यास में जप लर्निंग है। निरंतरता बनाए रखिए एक दिन परमात्मा आपको उपलब्ध होगा।
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