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मंगलवार, दिसंबर 14, 2010

काल के हर अर्थ को समझिए...


साहित्य में काल शब्द के दो अर्थ बताए गए हैं- एक है समय और दूसरा है मृत्यु। आध्यात्मिक अर्थ में थोड़ा गहरे उतरने पर यह दोनों एक दूसरे से मिले हुए नजर आएंगे। सिख सम्प्रदाय में लोग सत्श्रीअकाल का सम्बोधन करते हैं। यहां अकाल शब्द बहुत सुन्दर संदेश दे रहा है। इसका अर्थ है काल रहित। सत्श्रीअकाल का मतलब हुआ जो काल रहित है वही सत्य है।
चलिए देखें काल रहित कौन हो सकता है। जो भविष्य की व्यर्थ कल्पनाओं से मुक्त हो तथा बीते हुए समय के बेकार चिंतन से स्वयं को दूर रखे ऐसे व्यक्ति को वर्तमान में टिकने में आसानी रहेगी। जब किसी की मृत्यु देखी जाती है तो आदमी का चिंतन शुरु होता है कभी हम भी ऐसे ही मरेंगे। अपनी मृत्यु कोई नहीं देख पाता।
मृत्यु क्या होती है यह तो दूसरे को मरता देखकर ही पता लगता है। भूतकाल का यही चिंतन भविष्य काल से जुड़ जाता है। भविष्य में हम भी मरेंगे यह अज्ञात भय मृत्यु को लाए या न लाए अन्य चिंताओं को जरूर जीवन में ला देता है और फिर शुरु होता है सोचने का दौर। ऐसा हो जाएगा तो क्या होगा, ऐसा नहीं हुआ तब क्या होगा।
इसलिए भूत काल और भविष्य काल के वजन और आकर्षण से जैसे ही मुक्त होंगे हमारा वर्तमान काल कालातीत अवस्था बन जाएगा जिसे कहेंगे शून्य अवस्था और यहीं से वर्तमान को जीया जा सकता है। यदि वर्तमान पर टिके हैं तो एक बात समझ लें वर्तमान में कोई नहीं मरता, वर्तमान में सिर्फ जीवन है। आप जी रहे हैं यही वर्तमान है। भविष्य और भूत का चिंतन के चक्कर में समय बीतता चला जाता है। कई लोग सोचते ही रह जाते हैं और परमात्मा की बनाई दुनिया का आनन्द नहीं उठा पाते हैं।